केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आईपीएस नीति में बदलाव किया है। यह बदलाव अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति से जुड़ा है। नीति संशोधन को अहम माना जा रहा है। इससे केंद्रीय एजेंसियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी। सरकार ने योग्यता शर्तों में संशोधन किया है। यह फैसला प्रशासनिक सुधार की दिशा में है।
अब तक कुछ चुनिंदा एजेंसियों में ही इंडक्शन संभव था। अधिकारियों को न्यूनतम पांच साल की सेवा जरूरी थी। अब एनसीबी को भी इस सूची में जोड़ा गया है। इससे मादक पदार्थ नियंत्रण को बल मिलेगा। आईपीएस अधिकारी एनसीबी में एसपी स्तर पर तैनात हो सकेंगे। यह बदलाव लंबे समय से अपेक्षित था।
गृह मंत्रालय का मानना है कि अनुभवी अधिकारी जरूरी हैं। नीति बदलाव से दक्षता बढ़ेगी। एजेंसियों में बेहतर नेतृत्व मिलेगा। आंतरिक सुरक्षा मजबूत होगी। यह कदम रणनीतिक रूप से अहम है। आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम दिखेंगे।



