11वीं से 13वीं संयुक्त जेपीएससी मेंस परीक्षा का मामला हाईकोर्ट पहुंचा है। पहले एकल पीठ ने याचिका खारिज कर दी थी। अब उसी फैसले को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने एलपीए दाखिल किया है। डबल बेंच में इसकी सुनवाई हुई। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझा। अदालत ने कहा कि चयनित उम्मीदवार प्रभावित होंगे। इसलिए उन्हें सुनवाई में शामिल करना जरूरी है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश जारी किए। मामले की अगली दिशा तय हो रही है।
मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक की अध्यक्षता में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति राजेश शंकर भी पीठ में शामिल रहे। अदालत ने 342 सफल अभ्यर्थियों को प्रतिवादी बनाने का आदेश दिया। सभी को दो सप्ताह में नोटिस देने को कहा गया। जेपीएससी की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने पक्ष रखा। आयोग ने परीक्षा प्रक्रिया को सही बताया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ताओं ने आपत्तियां दोहराईं। डिजिटल मूल्यांकन पर सवाल उठाए गए। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुना। आगे सुनवाई जारी रहेगी।
एकल पीठ ने पहले ही परिणाम रद्द करने से इनकार किया था। अदालत ने कहा था कि याचिका समयबद्ध नहीं है। मूल्यांकन नियमों का उल्लंघन साबित नहीं हुआ। डिजिटल मूल्यांकन को नियमसंगत बताया गया। परीक्षकों के अनुभव पर भी अदालत संतुष्ट थी। कोर्ट ने याचिका को निराधार माना था। अब उसी आदेश को चुनौती दी गई है। डबल बेंच में मामला लंबित है। अंतिम फैसला आना बाकी है। चयनित अभ्यर्थियों की नजर कोर्ट पर टिकी है।



