सुबह की पहली रोशनी आने से पहले ही रांची की सड़कों पर छोटे बच्चे दिख जाते हैं। उनकी सांसें धुंध में बदलती और हाथ ठंड से कांपते नजर आते हैं। मौसम जितना कठोर है, उतनी ही सख्त है स्कूल जाने की मजबूरी।
अभिभावक बताते हैं कि वे चाहकर भी बच्चों को रोक नहीं पा रहे। स्कूल की उपस्थिति नीति उन्हें मजबूर करती है। कई बच्चों में बीमारी के लक्षण दिखने लगे हैं, फिर भी पढ़ाई का दबाव बना हुआ है।
स्कूल प्रबंधन भी मानता है कि स्थिति खराब है, पर आदेश के बिना वे बदलाव नहीं कर सकते। शहर इंतजार में है कि ठंड कम हो या प्रशासन कोई राहत आदेश जारी करे।


