crimeJharkhandStates

बायो मेडिकल वेस्ट पर झारखंड हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी.

अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ पर्यावरण अधिकार बताया.

झारखंड हाईकोर्ट ने बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन को संवैधानिक अधिकार से जोड़ा है। कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण-मुक्त हवा और पानी जीवन के अधिकार का हिस्सा हैं। लंबे समय से लंबित जनहित याचिका का निपटारा करते हुए अहम टिप्पणियां की गईं। न्यायालय ने प्रशासनिक लापरवाही पर चिंता जताई। कोर्ट के अनुसार चिकित्सा कचरे से गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं। इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।

कोर्ट ने माना कि 1998 के पुराने नियमों की जगह 2016 के नए नियम लागू हैं। इन नियमों में हर स्तर पर जवाबदेही तय है। राज्य में पहले स्थिति बेहद चिंताजनक थी। संक्रमित सुइयां और मेडिकल कचरा खुले में मिला था। लगातार न्यायिक निगरानी से ढांचा मजबूत हुआ। अब राज्य में कई ट्रीटमेंट फैसिलिटी चालू हैं।

न्यायालय ने साफ किया कि अब आगे निरंतर कोर्ट की निगरानी जरूरी नहीं। प्रशासन को स्वयं नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा। उल्लंघन पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी। अस्पतालों में वेस्ट मैनेजमेंट कमेटी बनानी होगी। डिजिटल ट्रैकिंग अनिवार्य की गई है। कोर्ट ने नागरिकों को कानूनी उपाय अपनाने का अधिकार बताया।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button