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रिम्स परिसर अतिक्रमण हटाने पर कोर्ट ने विरोध याचिकाएं खारिज कीं.

सार्वजनिक भूमि कब्जे को अदालत ने गंभीर प्रशासनिक चुनौती बताया.

रांची में रिम्स परिसर वर्षों से अतिक्रमण के बोझ तले दबा हुआ था. कई बार शिकायतें उठीं, लेकिन कार्रवाई सीमित रही. इस बार मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा और अदालत ने कड़ा रुख अपनाया. अदालत ने सुनवाई में सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया. न्यायालय ने कहा कि अस्पताल परिसर की जमीन अत्यधिक महत्वपूर्ण है. मरीजों की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है. विरोधियों द्वारा दाखिल हस्तक्षेप याचिका भी अस्वीकार की गई. अदालत ने यह भी कहा कि यह अभियान सार्वजनिक हित से जुड़ा है. इसलिए इसे किसी भी तरह बाधित नहीं किया जा सकता. यह निर्णय अब प्रशासन को मजबूत आधार देता है.

सुनवाई में प्रशासन की ओर से विस्तृत दस्तावेज पेश किए गए. डीसी, एसएसपी तथा बड़गाई सीओ कोर्ट में मौजूद रहे. उन्होंने बताया कि पहले ही 72 घंटे का समय दिया गया था. अतिक्रमणकारियों ने इस समय सीमा का पालन नहीं किया. प्रशासन ने कहा कि सभी कदम विधिक रूप से सही हैं. अदालत ने इसे स्वीकार करते हुए अभियान जारी रखने का निर्देश दिया. परिसर में अतिक्रमण हटने से अस्पताल की कार्यप्रणाली को लाभ मिलेगा. सुरक्षा, पार्किंग और इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार में भी सुधार होगा. कई वर्षों से लंबित समस्याएं अब सुलझने की राह पर होंगी.

कैलाश कोठी से जुड़े विवाद पर अदालत ने अलग निर्णय रखा है. इस स्थल को हटाने पर रोक बरकरार रहेगी. अगले सप्ताह इसपर विस्तृत सुनवाई होगी. लोग इस फैसले को बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देख रहे हैं. स्थानीय निवासियों ने अभियान का समर्थन किया है. मरीजों के लिए भी यह राहत की खबर है. अस्पताल का वातावरण बेहतर होने की उम्मीद है. आने वाले दिनों में कार्रवाई और तेज हो सकती है. प्रशासन ने कहा कि निर्देशों के अनुसार एक-एक कदम आगे बढ़ाया जाएगा. यह मामला शहर के प्रशासनिक सुधार का उदाहरण भी बनेगा.

 

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