यह निर्णय देश भर में हाई-स्पीड वंदे भारत स्लीपर सेवाओं के तेजी से विस्तार को देखते हुए लिया गया है। यह परियोजना सुनिश्चित करेगी कि इन अत्याधुनिक स्लीपर ट्रेनों के लिए पर्याप्त और उन्नत रखरखाव सुविधाएँ उपलब्ध हों, जिससे उनकी दक्षता और विश्वसनीयता बनी रहे।
एक अधिकारी ने जानकारी दी कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के लिए यह रखरखाव और कार्यशाला डिपो परियोजना ‘टेक्नोलॉजी पार्टनर मोड’ पर विकसित की जा रही पहली परियोजना है। इस मोड के तहत, अत्याधुनिक तकनीकों और विशेषज्ञता का लाभ उठाने के लिए निजी क्षेत्र की तकनीकी कंपनियों को शामिल किया जाता है। पहले चरण की सफलता के बाद, दूसरे चरण की मंजूरी से यह स्पष्ट है कि रेलवे इन प्रीमियम सेवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के नियमित निरीक्षण, मरम्मत और ओवरहॉलिंग के लिए विश्वस्तरीय बुनियादी ढाँचा तैयार करना है। डिपो के विस्तार से रखरखाव चक्र तेज होगा और ट्रेनों की उपलब्धता में सुधार होगा, जिससे यात्रियों को बेहतर और समयबद्ध सेवाएँ मिल सकेंगी। रेलवे की यह पहल ‘मेक इन इंडिया’ और आधुनिक भारतीय रेल के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह कदम यात्री ट्रेनों के रखरखाव की गुणवत्ता में एक बड़ा सुधार लाएगा।



