सारंडा वन क्षेत्र को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राज्य सरकार ने अलग रुख अपनाया है। सरकार ने आदेश को तुरंत लागू नहीं किया है। इसके बजाय पुनर्विचार याचिका दायर की गई है। यह तथ्य विधानसभा में सामने आया। सरकार ने इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया। विधायक सरयू राय ने सवाल उठाया। उन्होंने आदेश के अनुपालन को लेकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा। सरकार ने लिखित जवाब दिया। जवाब में रिव्यू पिटिशन की पुष्टि की गई। लेकिन विस्तृत जानकारी नहीं दी गई।
पर्यावरण और वन विभाग ने आदेश का विवरण सदन में रखा। सुप्रीम कोर्ट ने 13 नवंबर 2025 को आदेश दिया था। आदेश के अनुसार तीन महीने में अधिसूचना जारी होनी थी। 31468.25 हेक्टेयर क्षेत्र को अभयारण्य घोषित करना था। छह कम्पार्टमेंट को बाहर रखने की छूट दी गई थी। विभाग ने आदेश को स्वीकार किया। समय सीमा समाप्त होने की बात भी मानी। इसके बावजूद अधिसूचना जारी नहीं हुई। सरकार ने इसे विचाराधीन मामला बताया। अदालत में पुनर्विचार लंबित होने की बात कही गई।
यह मामला न्यायिक और प्रशासनिक संतुलन से जुड़ा है। सरकार ने सीधे आदेश लागू करने से परहेज किया है। खनन और वन संरक्षण का टकराव सामने आया है। छह कम्पार्टमेंट खनन क्षेत्र में आते हैं। शेष क्षेत्र अभयारण्य बनने की प्रक्रिया में है। सुप्रीम कोर्ट की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर है। राज्य सरकार की कानूनी रणनीति महत्वपूर्ण है। पर्यावरण संरक्षण का सवाल भी जुड़ा है। देरी को लेकर आलोचना हो रही है। आने वाले समय में स्थिति स्पष्ट होगी।


