पिछले कुछ दिनों से इंडिगो की अस्थिर उड़ान व्यवस्था ने देशभर के यात्रियों को परेशान किया। सैकड़ों उड़ानें रद्द हुईं, हजारों लोग घंटों इंतजार में फंसे रहे। अब जबकि कंपनी दावा कर रही है कि सिस्टम सुधर चुका है, सवाल उठ रहे हैं कि यह समस्या पहली जगह हुई क्यों?
अगर कंपनी अब यह कह रही है कि कैंसिलेशन पहले ही बता दिए जाएंगे, तो पहले ऐसा क्यों नहीं हुआ? यात्रियों ने जो समय, पैसा और मानसिक तनाव झेला है, उसका जिम्मेदार कौन होगा?
बेहतर है कि यह सुधार सिर्फ बयान न बनकर स्थायी व्यवस्था में बदले। आखिरकार विमानन उद्योग का मतलब सिर्फ उड़ान नहीं, भरोसा भी होता है।



