झारखंड हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश जारी किया है। भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रन लीडर को अग्रिम जमानत दी गई है। अधिकारी पर दहेज लेने और क्रूरता के आरोप थे। कोर्ट ने इस मामले को असाधारण बताया। अदालत ने कहा कि स्वतंत्रता से बड़ा कोई अधिकार नहीं है। देशसेवा कर रहे अधिकारी के मामले को गंभीरता से देखा गया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच की स्थिति पर विचार किया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता सहयोग कर रहा था। उसके फरार होने का कोई प्रमाण नहीं था। इसके बावजूद इश्तेहार जारी किया गया। अदालत ने इसे जल्दबाजी भरा कदम माना। इससे अधिकारी की व्यक्तिगत आजादी प्रभावित हुई।
याचिकाकर्ता ने बताया कि वह IAF में कार्यरत है। उसकी पत्नी चिकित्सा क्षेत्र में कार्य करती है। उसने कहा कि वह साथ रहना चाहता है। परिवार के सदस्यों को पहले ही राहत मिल चुकी थी। निचली अदालत वारंट रद्द कर चुकी थी। इन्हीं तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत दी।


