हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि फैसलों पर समय पर कार्रवाई जरूरी है। देरी से शासन व्यवस्था कमजोर होती है। न्यायालय ने प्रशासनिक जिम्मेदारी पर जोर दिया। मामले को गंभीर लापरवाही से जोड़ा गया।
सरकार की ओर से बताया गया कि अधिकारों की सीमाएं अलग-अलग हैं। उपायुक्त कुछ अधिकारियों पर सीधे कार्रवाई नहीं कर सकते। लेकिन राजस्व कर्मचारी पर कार्रवाई संभव थी। अदालत ने पूछा कि फिर भी कार्रवाई देर से क्यों हुई। जवाब स्पष्ट नहीं मिल पाया।
कोर्ट ने व्यवस्था सुधारने के उपाय मांगे हैं। विभागीय स्तर पर परामर्श की बात कही गई। अगली सुनवाई में हलफनामा दाखिल किया जाएगा। अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख निर्धारित की। मामले पर न्यायालय की निगरानी जारी रहेगी।



