रांची : चतरा के चर्चित टेरर फंडिंग मामले में एनआईए विशेष अदालत ने फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी अनिश्चय गंझू की जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह मामला मगध और आम्रपाली कोयला परियोजनाओं से जुड़ा हुआ है। आरोपी वर्ष 2020 से न्यायिक हिरासत में है। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें अदालत में रखी गईं। अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों का अवलोकन किया। इसके बाद जमानत आवेदन को अस्वीकार कर दिया गया। मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रकरण माना जा रहा है। एनआईए लगातार इस मामले की जांच कर रही है। फैसले के बाद कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। अदालत का आदेश न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप जारी किया गया है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि आरोपी का संबंध प्रतिबंधित संगठन टीपीसी से रहा है। उस पर अवैध वसूली के जरिए धन जुटाने का आरोप लगाया गया है। कोयला परियोजना क्षेत्रों में कथित रूप से लेवी वसूली की जाती थी। स्थानीय व्यापारियों को डराकर धन वसूले जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि इस गतिविधि में कई लोग शामिल थे। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुई थीं। एजेंसी ने विभिन्न साक्ष्यों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। मामले की जांच कई चरणों में की गई थी। टेरर फंडिंग नेटवर्क की भूमिका की भी जांच हुई। इस कारण मामले को गंभीर श्रेणी में रखा गया है। अदालत ने इन्हीं तथ्यों के आधार पर अपना निर्णय दिया।
मूल रूप से यह मामला टंडवा थाना में दर्ज किया गया था। बाद में एनआईए ने जांच अपने हाथ में ली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने स्वतंत्र रूप से केस दर्ज किया था। इसके बाद व्यापक स्तर पर अनुसंधान शुरू किया गया। मामले में कई अन्य आरोपी भी शामिल बताए गए हैं। कुछ आरोपियों को उच्च अदालतों से जमानत मिल चुकी है। सुदेश केडिया, महेश अग्रवाल और संजय जैन जैसे नाम इस मामले से जुड़े रहे हैं। अन्य आरोपियों को भी अलग-अलग समय पर राहत मिली है। इसके बावजूद अनिश्चय गंझू की याचिका स्वीकार नहीं की गई। अदालत ने उसे जमानत देने से स्पष्ट इनकार किया। फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में ही रहेगा।



