झारखंड में एमएसएमई कोयला आपूर्ति नीति को लेकर गंभीर शिकायत दर्ज कराई गई है। वित्त विभाग को भेजे गए पत्र में कई अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। शिकायत में प्रवर्तन निदेशालय से भी जांच कराने की मांग की गई है। आरोप है कि कुछ इकाइयों ने नियमों का गलत लाभ उठाया। कोयले की खपत और उत्पादन के आंकड़ों में गड़बड़ी का दावा किया गया है। विभागीय रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता बताया है। सरकार को आर्थिक नुकसान होने की बात कही गई है। मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। शिकायत ने प्रशासनिक हलकों का ध्यान आकर्षित किया है।
विश्वनाथ झा द्वारा भेजे गए शिकायत पत्र में कई बिंदुओं का उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि कई एमएसएमई इकाइयों का वर्षों से गहन ऑडिट नहीं हुआ। वर्ष 2021 के बाद प्रभावी निरीक्षण नहीं होने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायत के अनुसार इससे अनियमितताओं को बढ़ावा मिला। वर्ष 2025-26 में 13 इकाइयों को कोयला आवंटित किया गया था। इनमें से केवल कुछ इकाइयों ने ही बुकिंग कराई। अन्य इकाइयों के रिकॉर्ड पर सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में डेटा में हेरफेर की आशंका जताई गई है। पूरे मामले की विस्तृत जांच की मांग की गई है। संबंधित विभागों से कार्रवाई का अनुरोध किया गया है।
शिकायत में करीब 170 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले बहुत कम कोयले की बुकिंग हुई। इससे सीसीएल, राज्य सरकार और जीएसटी को नुकसान होने की बात कही गई है। बिना वैध माइनिंग चालान के कोयला परिवहन का भी आरोप लगाया गया है। इसे नियमों का उल्लंघन बताया गया है। शिकायत में दोषी अधिकारियों और संबंधित इकाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए सख्त निगरानी की आवश्यकता बताई गई है। मामले की जांच वित्त विभाग, खान विभाग और ईडी से कराने का अनुरोध किया गया है। फिलहाल आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले में संबंधित एजेंसियों की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।



