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चौदह बहादुर पुलिसकर्मियों के नाम राष्ट्रीय वीरता सम्मान के लिए भेजे

माओवादी विरोधी सफल अभियानों के आधार पर केंद्र को भेजी अनुशंसा.

झारखंड में माओवादी विरोधी अभियानों में उल्लेखनीय साहस और उत्कृष्ट पुलिसिंग का प्रदर्शन करने वाले 14 पुलिस अधिकारियों और जवानों को राष्ट्रीय सम्मान दिलाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने राष्ट्रपति पुलिस पदक और पुलिस वीरता पदक के लिए उनके नामों की अनुशंसा की है। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दिया है। अब मंत्रालय इन सभी नामों की विस्तृत समीक्षा करेगा। अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद सम्मान की घोषणा की जाएगी। अनुशंसित सूची में एक आईपीएस अधिकारी भी शामिल हैं। इसके अलावा डिप्टी कमांडेंट, डीएसपी, इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर और पुलिस जवानों के नाम भी भेजे गए हैं।

24 जनवरी 2025 को बोकारो के पेंक-नारायणपुर थाना क्षेत्र के बंसी गांव के जंगल में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस कार्रवाई में दो हार्डकोर माओवादी मारे गए थे। मौके से AK-47 और इंसास राइफल बरामद की गई थी। इस अभियान के लिए तत्कालीन बोकारो एसपी मनोज स्वर्गियारी सहित छह पुलिसकर्मियों के नाम पुलिस वीरता पदक के लिए भेजे गए हैं। वहीं 2 नवंबर 2019 को चतरा के लावालौंग में टीएसपीसी उग्रवादियों के हमले का बहादुरी से मुकाबला करने वाले तीन पुलिसकर्मियों के नाम भी अनुशंसित किए गए हैं। 29 जनवरी 2023 को चतरा के बूटकुईंया क्षेत्र में संयुक्त अभियान के दौरान एक इनामी माओवादी को मार गिराया गया था। इस अभियान में शामिल दो पुलिसकर्मियों के नाम भी सम्मान सूची में शामिल किए गए हैं। इन अभियानों को राज्य की बड़ी नक्सल विरोधी सफलताओं में गिना जाता है। सरकार ने सभी के योगदान को सराहनीय बताया है। इन अभियानों ने सुरक्षा बलों की क्षमता को भी साबित किया है।

31 मई 2021 को गुमला के कुरुमगढ़ थाना क्षेत्र में उग्रवादियों के खिलाफ चलाए गए अभियान को भी अनुशंसा का आधार बनाया गया है। इस अभियान में डीएसपी विकास आनंद लांगुरी, दारोगा विवेकानंद श्रीवास्तव और सिपाही अशोक कुमार की भूमिका महत्वपूर्ण रही थी। बेहतर रणनीति और उत्कृष्ट अनुसंधान के लिए उनके नाम भी भेजे गए हैं। अब केंद्रीय गृह मंत्रालय सभी मामलों की समीक्षा करेगा। मंजूरी मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों और जवानों को राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान उनके साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की पहचान होगा। इससे झारखंड पुलिस का मनोबल और मजबूत होने की उम्मीद है। राज्य सरकार ने कहा कि वीरता का सम्मान पुलिस बल को नई प्रेरणा देता है। अब अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।

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