रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसके तहत जेपीएससी की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्तियां रद्द की गई थीं। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत में हुई। नियुक्ति रद्द किए जाने के खिलाफ तीन अलग-अलग याचिकाएं अदालत में दाखिल की गई थीं। सुनवाई के बाद कोर्ट ने सरकार के आदेश पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। अदालत ने चयनित अभ्यर्थियों को दोबारा काम पर लेने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को हटाने से पहले नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत का पालन जरूरी है। अदालत के अनुसार उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाए बिना नियुक्तियां रद्द करना सही नहीं है। कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से 15 सितंबर तक जवाब मांगा है। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि सीआईडी जांच में 40 प्रतिशत तक गड़बड़ी सामने आई है। सरकार ने यह भी कहा कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। अदालत ने इस पर कहा कि कुछ लोगों की गलती के कारण सभी चयनित अभ्यर्थियों को दंडित नहीं किया जा सकता।
मामले में दीपमाला एवं अन्य और सोनम कुमारी की ओर से दाखिल याचिकाओं में 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के विज्ञापन संख्या 1/2024 को रद्द करने के आदेश को चुनौती दी गई है। वहीं सौरव सिंह एवं अन्य ने फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा के विज्ञापन संख्या 18/2023 की नियुक्ति रद्द करने के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया है। याचिकाकर्ता सोनम कुमारी ने बताया कि उन्होंने इस नौकरी के लिए अपनी दूसरी नौकरी छोड़ दी थी। उन्हें 24 नवंबर 2025 को नियुक्ति पत्र दिया गया था। उन्होंने नियुक्ति के बाद प्रशिक्षण भी पूरा किया। इसके बावजूद सरकार ने 18 अगस्त को अधिसूचना जारी कर नियुक्ति रद्द कर दी। याचिका में सरकार के इस फैसले को रद्द करने की मांग की गई है। प्रार्थियों की ओर से इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स, प्रेरणा झुनझुनवाला और पीएएस पति ने अदालत में पक्ष रखा। अदालत ने फिलहाल सरकार के फैसले पर रोक लगाकर अभ्यर्थियों को राहत दी है। साथ ही मामले में सरकार का पक्ष स्पष्ट करने के लिए जवाब मांगा है।
गौरतलब है कि सीआईडी जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के बाद सरकार ने 18 अगस्त की देर रात कई परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी। सरकार ने उन परीक्षाओं पर कार्रवाई की थी, जिनमें टीडीपीएल की भूमिका सामने आने की बात कही गई थी। इसके साथ ही वर्ष 2014 से हुई नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित गड़बड़ी की जांच का फैसला लिया गया था। इस संबंध में कार्मिक प्रशासनिक विभाग ने अलग-अलग अधिसूचनाएं जारी की हैं। विभाग की अधिसूचना में 22 परीक्षाओं को रद्द करने की बात कही गई है। छह परीक्षाओं की प्रक्रिया को स्थगित किया गया है। वहीं 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखा गया है। हाईकोर्ट ने कहा कि जांच में सामने आई गड़बड़ियों पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। अदालत ने संबंधित मामलों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाने की बात भी कही। मामले की अगली सुनवाई अब 15 सितंबर को होगी।



