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पांच दशक पुराने कर विवाद का समझौते से अंत.

टाटा स्टील और विभाग के बीच मध्यस्थता से बनी सहमति.

रांची : सुप्रीम कोर्ट में लंबित करीब 50 साल पुराने कर विवाद का समाधान विशेष लोक अदालत के माध्यम से हो गया है। यह मामला टाटा स्टील लिमिटेड और झारखंड के कमर्शियल टैक्स विभाग से जुड़ा था। समाधान समारोह के तहत झालसा ने मामले को डीएलएसए, रांची के मध्यस्थता केंद्र भेजा था। झालसा की ओर से कुल 116 मामलों को मध्यस्थता के लिए डीएलएसए, रांची को सौंपा गया था। इन मामलों में दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू की गयी। मध्यस्थता वर्चुअल और फिजिकल दोनों माध्यमों से करायी गयी। कुल 10 मामलों में दोनों पक्षों के बीच सुलह करायी गयी। टाटा स्टील से जुड़ा मामला भी इन्हीं मामलों में शामिल था। यह विवाद वर्ष 2019 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित था। सुप्रीम कोर्ट में मामला सीए संख्या 4061/2019 के रूप में दर्ज था।

मामले की शुरुआत वर्ष 1977-78 में हुई थी। उस समय कमर्शियल टैक्स विभाग ने टाटा स्टील पर 68,39,946 रुपये का पेनल्टी लगाया था। टाटा स्टील ने इस पेनल्टी के खिलाफ 25 लाख रुपये जमा किए थे। इसके बाद कंपनी ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। उच्च न्यायालय ने कमर्शियल टैक्स विभाग के पेनल्टी आदेश को निरस्त कर दिया था। इसके बाद विभाग ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपील की थी। मामला बाद में सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया था। कई वर्षों तक यह विवाद सर्वोच्च न्यायालय में लंबित रहा। समाधान समारोह के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मामले को चिन्हित किया था। इसके बाद झालसा ने मामले को मध्यस्थता केंद्र, रांची भेजा। यहां दोनों पक्षों के बीच समाधान को लेकर बातचीत शुरू हुई।

मध्यस्थता के दौरान दोनों पक्षों के बीच करीब 10 बैठकें हुईं। झारखंड सरकार की ओर से कमर्शियल टैक्स विभाग के नोडल ऑफिसर सहायक आयुक्त संजय प्रसाद ने हिस्सा लिया। उन्होंने प्रस्तावित झारखंड कर समाधान योजना-2026 के तहत समाधान का प्रस्ताव रखा। टाटा स्टील के विधि विभाग की ओर से विकास मित्तल और आकर्षण कुमार ने बातचीत की। कई दौर की बातचीत के बाद दोनों पक्ष समझौते पर पहुंचे। समझौते के तहत पहले जमा किए गए 25 लाख रुपये के बाद शेष राशि की पांच प्रतिशत राशि का भुगतान किया जाएगा। यह राशि 30 दिनों के भीतर कमर्शियल टैक्स विभाग को देनी होगी। दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से पुराने विवाद को समाप्त करने पर सहमति जतायी। इस समझौते से करीब पांच दशक से चले आ रहे विवाद का अंत हुआ। मामले के समाधान की जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के सचिव की ओर से दी गयी।

 

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