पाकुड़ जिले में पैनम कोल कंपनी के कथित अवैध खनन से जुड़े मामले में अब एसीबी जांच करेगी। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने एसीबी को जांच कर पांच नवंबर तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। इस मामले में एक जनहित याचिका के माध्यम से कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया है। अदालत ने पुराने मामले में सरकारी कार्रवाई पर असंतोष जाहिर किया। कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2015 की रिपोर्ट के बाद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। अब मामले की जांच एसीबी के स्तर से कराई जाएगी। जांच एजेंसी मामले के पुराने दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच करेगी। कथित अवैध खनन से सरकारी राजस्व को हुए नुकसान की भी पड़ताल होगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले में आगे की दिशा तय हो सकती है।
पैनम कोल माइंस से जुड़े मामले में दुमका के डिविजनल कमिश्नर ने 19 अक्टूबर 2015 को रिपोर्ट दी थी। इस रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार की कार्रवाई को लेकर हाईकोर्ट ने सवाल उठाए। रिपोर्ट के बाद पाकुड़ के तत्कालीन डीसी सुनील कुमार को केवल शो-कॉज नोटिस दिया गया था। अदालत ने इस कार्रवाई को पर्याप्त नहीं माना। प्रार्थी अधिवक्ता राम सुभग सिंह ने मामले को लेकर जनहित याचिका दायर की है। याचिका में पैनम कोल माइंस के खनन और राजस्व से जुड़े मामलों को उठाया गया है। प्रार्थी का कहना है कि मामले में पहले जांच भी हुई थी। जांच रिपोर्ट तैयार होने के बावजूद उसके आधार पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसी स्थिति को लेकर अदालत ने सरकार से जवाब मांगा था। अब हाईकोर्ट ने एसीबी जांच का निर्देश दिया है। एसीबी को मामले की पूरी जांच कर अदालत को रिपोर्ट देनी होगी।
याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2015 में पैनम कोल माइंस कंपनी को पाकुड़ और दुमका जिले में कोयला खनन का लीज मिला था। आरोप है कि खनन के दौरान रॉयल्टी के रूप में मिलने वाले राजस्व में नुकसान हुआ। इससे सरकार को करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति होने का दावा किया गया है। मामले की जांच के बाद तैयार रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं होने की बात भी याचिका में कही गई है। हाईकोर्ट के नए निर्देश के बाद इस मामले में जांच फिर तेज होने की उम्मीद है। एसीबी खनन से संबंधित रिकॉर्ड और रॉयल्टी भुगतान की जानकारी की जांच कर सकती है। जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी सामने आ सकती है। एजेंसी उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मामले की स्थिति स्पष्ट करेगी। हाईकोर्ट ने जांच रिपोर्ट के लिए पांच नवंबर की समयसीमा तय की है। रिपोर्ट आने के बाद अदालत मामले में आगे का आदेश जारी कर सकती है। फिलहाल पैनम कोल माइंस से जुड़े कथित राजस्व नुकसान की जांच पर सबकी नजर है।



