रांची हाईकोर्ट ने माध्यमिक आचार्य भर्ती परीक्षा में 2,819 अभ्यर्थियों की पुनर्परीक्षा से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को CID में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने 2,819 अभ्यर्थियों की पहली और दूसरी दोनों परीक्षाओं का परिणाम जारी करने को कहा है। दोनों परीक्षाओं के परिणाम के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। कोर्ट ने जेएसएससी को मामले में संलिप्त लोगों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने की छूट दी है। अदालत ने नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि नियुक्ति पत्र आपराधिक जांच के परिणाम से प्रभावित होगा। यदि किसी अभ्यर्थी की संलिप्तता नहीं मिलती है तो वह उचित फोरम में शिकायत कर सकता है। इन निर्देशों के साथ अदालत ने संबंधित याचिका का निष्पादन कर दिया।
मामले में प्रार्थियों की ओर से पुनर्परीक्षा कराए जाने का विरोध किया गया था। उनका कहना था कि परीक्षा में उनकी कोई गलती नहीं थी। प्रार्थियों ने पहले आयोजित परीक्षा के आधार पर ही परिणाम जारी करने की मांग की थी। उन्होंने संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों को भी गलत बताया था। प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता रूपेश सिंह और शुभम मिश्रा ने पक्ष रखा। वहीं जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने अदालत में दलील पेश की। जेएसएससी ने बताया कि परीक्षा में करीब 24 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे। इनमें 2,819 अभ्यर्थियों की गतिविधियां परीक्षा के दौरान संदिग्ध पाई गई थीं। आयोग के अनुसार खंडपीठ के आदेश के अनुरूप इन अभ्यर्थियों की पुनर्परीक्षा कराई गई। जेएसएससी ने पुनर्परीक्षा कराने के अपने फैसले को उचित बताया।
आयोग ने अदालत को परीक्षा में अनधिकृत एक्सेस से जुड़ी जानकारी भी दी। जेएसएससी के अनुसार बाहर से अनऑथराइज्ड एक्सेस की पुख्ता जानकारी एजेंसी को मिली थी। कुछ अभ्यर्थियों के कंप्यूटर में किस आईडी से एक्सेस हुआ, इसकी जानकारी भी सामने आने की बात कही गई। परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी ने संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जेएसएससी को दी थी। आयोग ने कहा कि परीक्षा में हैकिंग अथवा अनधिकृत हस्तक्षेप की स्थिति सामने आई थी। इसी आधार पर 2,819 अभ्यर्थियों की पुनर्परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया था। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामले में CID जांच करेगी। जांच के दौरान संदिग्ध गतिविधियों और संभावित संलिप्तता की पड़ताल की जाएगी। जांच में किसी अभ्यर्थी की भूमिका नहीं मिलने पर उसे उचित मंच पर शिकायत का अधिकार होगा। वहीं जांच में संलिप्तता सामने आने पर नियुक्ति प्रक्रिया पर उसका असर पड़ सकता है।



