रांची में झारखंड हाईकोर्ट ने सरकारी सेवा से जुड़े कई मामलों में कर्मचारियों और शिक्षकों के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसले सुनाए हैं। इन आदेशों से वर्षों से लंबित मांगों को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रहे याचिकाकर्ताओं को राहत मिली है। सबसे पहले ग्रामीण सड़क परियोजना में संविदा पर काम कर रहे 10 सहायक अभियंताओं की सेवाओं को नियमित करने का आदेश दिया गया है। इनमें अंजनी कुमार समेत अन्य अभियंता शामिल हैं। अदालत ने उनकी नियुक्ति प्रक्रिया और लंबे कार्यकाल को नियमितीकरण के लिए महत्वपूर्ण आधार माना। सभी याचिकाकर्ता वर्ष 2013 से झारखंड स्टेट रूरल रोड डेवलपमेंट अथॉरिटी में काम कर रहे थे। वे निर्धारित शैक्षणिक योग्यता रखते हैं और नियमित सहायक अभियंताओं की तरह काम करते रहे हैं। दूसरी ओर, रिम्स में कार्यरत 28 असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसरों को भी पदोन्नति देने का रास्ता साफ हुआ है। कोर्ट ने उन्हें एक जुलाई 2019 से प्रोन्नति और उससे जुड़े अन्य लाभ देने का आदेश दिया है। रिम्स प्रबंधन को आठ सप्ताह के अंदर इस आदेश का पालन करना होगा। इन शिक्षकों की पदोन्नति का मामला वर्ष 2019 से लंबित था। वर्ष 2024 में प्रोन्नति समिति ने सभी 28 याचिकाकर्ताओं को इसके लिए योग्य माना था, इसके बावजूद उन्हें लाभ नहीं दिया गया। पुलिस विभाग के दरोगाओं की वरिष्ठता को लेकर भी अदालत ने महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। हाईकोर्ट के अनुसार सीधी भर्ती से नियुक्त दरोगाओं को वरीयता सूची में प्राथमिक स्थान मिलेगा। नौ सितंबर 2024 की विवादित सूची के आधार पर प्रोन्नति पर लगी रोक को भी जारी रखा गया है।
जल संसाधन विभाग में कार्यरत तीन जूनियर इंजीनियरों की पदोन्नति से जुड़ा मामला भी हाईकोर्ट पहुंचा था। अदालत ने रॉबिन अजय सिंह, पंकज कुमार और संदीप कुमार को 20 नवंबर 2012 से सहायक अभियंता के पद पर प्रोन्नति देने का निर्देश दिया है। उन्हें सभी परिणामी लाभ भी उपलब्ध कराने होंगे। कोर्ट ने कहा कि निलंबन, विभागीय आरोप तय होने या आपराधिक मामले में आरोप पत्र दाखिल होने जैसी निर्धारित स्थितियों में ही पदोन्नति रोकी जा सकती है। दुमका में चौकीदार भर्ती से जुड़े मामले में भी एक दिव्यांग अभ्यर्थी को नियुक्ति का अधिकार मिला है। अभ्यर्थी लिखित परीक्षा पास कर चुकी थीं, लेकिन शारीरिक परीक्षा में सामान्य अभ्यर्थियों के साथ दौड़ कराई गई थी। उन्होंने निर्धारित दौड़ 10 मिनट 3 सेकंड में पूरी की थी। महज तीन सेकंड की देरी के कारण उन्हें चयन से बाहर कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को आठ सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र जारी करने का आदेश दिया है। वर्ष 2016 की TGT बहाली के 34 शिक्षकों को भी वरिष्ठता के मामले में राहत मिली है। अदालत ने फरवरी 2019 से उनकी काल्पनिक नियुक्ति तिथि निर्धारित करने का निर्देश दिया है। इसके तहत उन्हें वरिष्ठता, वेतन वृद्धि और उन्नत वेतनमान का लाभ मिलेगा। हालांकि, पिछला बकाया वेतन देने का आदेश नहीं दिया गया है।
कल्याण विभाग के 13 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति का मामला भी अदालत ने स्वीकार किया है। हाईकोर्ट ने 30 अक्टूबर 2020 को जारी उस सरकारी आदेश को निरस्त कर दिया, जिसके जरिए उनकी मांग खारिज की गई थी। सरकार को पात्रता और रिकॉर्ड की जांच करने के बाद आठ सप्ताह में तृतीय श्रेणी में पदोन्नति का औपचारिक आदेश जारी करना होगा। अदालत ने परीक्षा पास करने की शर्त को लेकर भी आदेश में राहत दी है। वहीं, पलामू जिले के नौडीहा बाजार और छतरपुर प्रखंड के पारा शिक्षकों को सेवा समाप्ति के मामले में बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने 16 जनवरी 2025 को पलामू के उपायुक्त सह प्रथम अपीलीय प्राधिकार द्वारा जारी सेवा समाप्ति का आदेश रद्द कर दिया है। अदालत ने संबंधित शिक्षकों को तत्काल बहाल करने का निर्देश दिया है। उन्हें समिति के पक्ष में फैसले की तारीख से दोबारा सेवा में आने तक का पूरा वेतन या मानदेय भी दिया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि नियुक्ति और चयन से जुड़े दस्तावेजों को सुरक्षित रखना विभागीय अधिकारियों का दायित्व है। सरकारी रिकॉर्ड में कमी या दस्तावेजों के उपलब्ध नहीं होने के लिए शिक्षकों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इस तरह हाईकोर्ट के इन फैसलों से राज्य के कई विभागों के कर्मचारियों को सेवा संबंधी मामलों में राहत मिली है।



