जब जवाबदेही गायब हो जाए तो प्रश्न उठना स्वाभाविक.
ऑडिट रिपोर्ट ने बिजली निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए.
रांची : कोई भी सार्वजनिक संस्था तभी विश्वसनीय होती है जब उसके कार्य और वित्तीय स्थिति पारदर्शी हो। लेकिन झारखंड बिजली वितरण निगम की स्थिति इसके विपरीत दिखाई देती है। ऑडिट रिपोर्ट में सामने आए तथ्य बताते हैं कि कंपनी की संपत्तियों का न तो सही रिकॉर्ड है और न ही सत्यापन। यह सिर्फ गलत प्रबंधन नहीं, बल्कि नीति के स्तर पर कमी का संकेत है।
सुरक्षा जमा, ब्याज की गलत गणना, बिना बिल के राजस्व और संदिग्ध रकम जैसे मुद्दे संस्था की विश्वसनीयता को कमजोर करते हैं। यह केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों का हनन भी है। जब उपभोक्ता अपना पैसा जमा करता है, तो उसे सही हिसाब का हक होता है।
इस रिपोर्ट को सिर्फ दस्तावेज की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। यह चेतावनी है कि सिस्टम टूट रहा है। यदि इसे गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आने वाले समय में बिजली सेवा पर भरोसा और अधिक कम हो सकता है।



