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अपराध डेटा अपडेट न होना प्रशासनिक कमजोरी का संकेत.

देर से मिली जानकारी सुरक्षा प्रबंधन को कमजोर करती है.

अपराध रिकॉर्ड केवल नंबर नहीं होते. यह सरकार और पुलिस के निर्णय की नींव होते हैं. लेकिन मई 2025 के बाद झारखंड की एससीआरबी वेबसाइट पर कोई अपडेट नहीं हुआ है. इससे न केवल पारदर्शिता प्रभावित होती है, बल्कि जनता का विश्वास भी कमजोर होता है.

जब सीआईडी नियमित रूप से अपने रिकॉर्ड अपडेट कर सकती है, तो फिर एससीआरबी वेबसाइट क्यों रुकी है? यह सवाल जवाब मांगता है. नीति और सुरक्षा के लिए डेटा की समयबद्धता बेहद महत्वपूर्ण है.

पुलिस को इस दिशा में त्वरित सुधार की जरूरत है ताकि सिस्टम भरोसेमंद बने और आम जनता को सटीक जानकारी समय पर मिल सके.

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