रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार से जुड़े वीडियो मामले पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जेल के अंदर कैदियों के डांस करते वीडियो वायरल होने से प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठे हैं। इस मामले में दर्ज जनहित याचिका पर कोर्ट ने गंभीरता दिखाई। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत सरकार के जवाब से संतुष्ट नजर नहीं आई। कोर्ट ने इस पूरे मामले को सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक माना।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे को अधूरा करार दिया। अदालत ने कहा कि केवल वार्डर या सहायक जेलर को निलंबित करना पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने जेल अधीक्षक और जेल महानिरीक्षक की जवाबदेही तय न होने पर नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस की खंडपीठ ने पूछा कि बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। कोर्ट ने जवाब में पारदर्शिता की मांग की।
अदालत ने कहा कि अगर जेल के अंदर मोबाइल और इंटरनेट की सुविधा है तो यह न्याय व्यवस्था के लिए खतरा है। हाईकोर्ट ने सरकार को दो सप्ताह में सप्लीमेंट्री रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी पूछा कि मोबाइल जैमर काम कर रहे थे या नहीं। सीसीटीवी फुटेज से जिम्मेदार लोगों की पहचान हुई या नहीं, इसकी जानकारी मांगी गई। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगली सुनवाई तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो स्वतंत्र जांच कमेटी बनाई जाएगी।


