अदालत ने मामले को असाधारण बताया। कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्रता दांव पर लगी हुई थी। देश सेवा कर रहे अधिकारी के अधिकारों पर विचार जरूरी था। न्यायालय ने संतुलन बनाकर फैसला दिया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच प्रक्रिया की समीक्षा की। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता जांच में सहयोग कर रहा था। वह कहीं छिपा हुआ नहीं था। इसके बावजूद उसके खिलाफ इश्तेहार जारी किया गया। अदालत ने इसे गंभीर त्रुटि माना। इससे उसकी स्वतंत्रता पर असर पड़ा।
याचिकाकर्ता ने अदालत को अपनी स्थिति बताई। उसने कहा कि वह IAF में सेवा दे रहा है। उसकी पत्नी डेंटल सर्जन और लेक्चरर है। वह साथ रहने को तैयार है। परिवार के अन्य सदस्यों को पहले ही जमानत मिल चुकी थी। इन तथ्यों पर विचार कर हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत मंजूर की।


