सारंडा जंगलों में हुई मुठभेड़ के बाद माहौल तनावपूर्ण बताया जा रहा है। माओवादी संगठन ने आदिवासी गांवों की स्थिति पर बयान दिया है। संगठन के अनुसार लोग डरे हुए हैं। कई परिवार जंगल छोड़ने को मजबूर हुए हैं।
बयान में कहा गया है कि अचानक गोलीबारी से ग्रामीण सहम गए। हवाई गतिविधियों का भी जिक्र किया गया है। माओवादियों ने इसे जनता के अधिकारों का उल्लंघन बताया। संगठन ने इसे गंभीर मानवाधिकार मुद्दा बताया है।
संगठन ने समाज के विभिन्न वर्गों से समर्थन मांगा है। मजदूरों और किसानों से विरोध की अपील की गई है। छात्रों और बुद्धिजीवियों को भी जोड़ा गया है। बयान ने क्षेत्रीय माहौल को और संवेदनशील बना दिया है।



