झारखंड की राजनीति से जुड़ा एक अहम मामला हाईकोर्ट में सामने आया है। बाबूलाल मरांडी द्वारा दायर याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। मामला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके परिवार पर दिए गए बयानों से जुड़ा है। इन बयानों को लेकर चार थानों में प्राथमिकी दर्ज है। हाईकोर्ट ने अंतरिम संरक्षण हटाकर सख्त रुख दिखाया है।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को एक सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया। इसके बावजूद कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि पहले दी गई रोक अब प्रभावी नहीं रहेगी। इससे राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। मामले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मर्यादा से जोड़कर देखा जा रहा है।
एफआईआर एक निजी यूट्यूब चैनल पर अपलोड किए गए इंटरव्यू के बाद दर्ज हुई थीं। झामुमो कार्यकर्ताओं ने इसे अपमानजनक बताया था। अलग-अलग जिलों में केस दर्ज कराए गए। अब सभी मामलों में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ेगी। यह मामला राजनीतिक बयानबाजी की सीमाओं पर बहस को फिर तेज कर रहा है।


