रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट में एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई हुई। यह याचिका सीसीए के तहत की गई निरुद्धीकरण कार्रवाई के खिलाफ दायर की गई है। मामले में भैरव सिंह प्रार्थी हैं। मंगलवार को अदालत ने इस पर प्रारंभिक सुनवाई की। कोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने को कहा। अगली सुनवाई की तारीख भी तय कर दी गई। यह सुनवाई सात जनवरी को होगी। अदालत ने फिलहाल कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया। मामला गंभीर कानूनी प्रश्नों से जुड़ा है। दोनों पक्षों की दलीलें अहम मानी जा रही हैं।
सुनवाई जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता में हुई। खंडपीठ में जस्टिस संजय प्रसाद भी शामिल थे। प्रार्थी की ओर से वरिष्ठ वकीलों ने दलील रखी। उन्होंने कहा कि सीसीए का प्रयोग गलत तरीके से किया गया। पहले जिला बदर की कार्रवाई हो चुकी थी। उसी आधार को दोबारा नहीं अपनाया जा सकता। यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। वकीलों ने कानून की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। अदालत ने इन दलीलों को गंभीरता से सुना। राज्य सरकार को जवाब देना होगा।
वकीलों ने भैरव सिंह की सामाजिक भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वह पेशेवर अपराधी नहीं हैं। उनके खिलाफ दर्ज मामले आंदोलनों से जुड़े हैं। ये आंदोलन धार्मिक विश्वास से संबंधित थे। इन्हें आपराधिक गतिविधि नहीं माना जाना चाहिए। अदालत ने सभी तथ्यों को रिकॉर्ड में लिया। मामले में संवैधानिक अधिकारों का प्रश्न है। अगली सुनवाई में स्थिति और स्पष्ट होगी। फिलहाल न्यायिक प्रक्रिया जारी है। सभी की नजरें राज्य सरकार के जवाब पर हैं। कोर्ट का फैसला महत्वपूर्ण होगा।


