राज्य में नियुक्ति से जुड़े विज्ञापन रद्द करने के मामले में सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष अपना जवाब दाखिल किया है। सरकार ने शपथ पत्र में कहा है कि नियुक्ति संबंधी नीतियां तय करना उसका वैधानिक अधिकार है। इसके साथ ही सरकार को नियुक्ति प्रक्रिया संचालित करने और जरूरत पड़ने पर विज्ञापन रद्द करने का भी अधिकार है। जेपीएससी के उप सचिव सुधीर कुमार की ओर से अदालत में शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया है। इसमें विज्ञापन संख्या 21/2023 को रद्द किए जाने की जानकारी दी गई है। इस विज्ञापन के जरिए सीडीपीओ पदों पर नियुक्ति की गई थी। बाद में सरकार ने संबंधित अधिसूचना जारी कर इस विज्ञापन को रद्द कर दिया। सरकार के इस निर्णय को याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में संबंधित अधिसूचना को समाप्त करने की मांग की गई है। मामले में अदालत पहले ही स्थगनादेश जारी कर चुकी है।
याचिकाकर्ता की ओर से सरकार की ओर से अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में कहा गया है कि विज्ञापन रद्द करने का आदेश उचित तरीके से जारी नहीं किया गया। सरकार ने अपने शपथ पत्र में इस दलील को स्वीकार नहीं किया है। सरकार का कहना है कि उसके पास कानूनी और प्रशासनिक दोनों अधिकार मौजूद हैं। इन्हीं अधिकारों के तहत विशेष परिस्थितियों में विज्ञापन को रद्द करने का निर्णय लिया गया। सरकार ने अदालत को बताया कि वह इस मामले में निर्णय लेने के लिए सक्षम प्राधिकारी है। शपथ पत्र में नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े प्रशासनिक निर्णयों का भी उल्लेख किया गया है। सरकार ने याचिकाकर्ता की दलीलों को खारिज करने की मांग की है। उसके अनुसार विज्ञापन रद्द करने की कार्रवाई उसकी वैधानिक शक्तियों के तहत की गई है। अब अदालत में सरकार के इस जवाब और याचिकाकर्ता की आपत्तियों पर विचार किया जाएगा।
सरकार ने कहा है कि विज्ञापन रद्द करने के पीछे मौजूद अन्य कारणों को भी सुनवाई के दौरान सामने रखा जाएगा। इन कारणों पर सरकार अदालत में विस्तार से अपना पक्ष रखेगी। सरकार का कहना है कि मामले से जुड़े सभी जरूरी तथ्य बहस के दौरान न्यायालय के समक्ष रखे जाएंगे। इससे विज्ञापन रद्द करने के निर्णय की परिस्थितियां स्पष्ट हो सकती हैं। सीडीपीओ नियुक्ति का मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गया है। सरकार ने अपने फैसले को अधिकार क्षेत्र के भीतर लिया गया निर्णय बताया है। दूसरी तरफ याचिकाकर्ता ने अधिसूचना की वैधता पर सवाल उठाया है। अदालत दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर मामले पर विचार करेगी। सुनवाई में सरकार के वैधानिक अधिकारों के साथ प्रक्रिया की वैधता भी महत्वपूर्ण मुद्दा रह सकती है। अदालत के आदेश के बाद सीडीपीओ नियुक्ति से जुड़े विज्ञापन की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।



