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हाईकोर्ट ने झूठी जानकारी वाली जनहित याचिकाओं पर सख्ती दिखाई.

गलत तथ्यों पर जुर्माना लगाकर न्यायिक प्रक्रिया दुरुपयोग रोका गया.

रांची में जनहित याचिकाओं को लेकर अदालत का रुख सख्त हो गया है। हाईकोर्ट ने साफ किया है कि झूठी जानकारी बर्दाश्त नहीं होगी। कई मामलों में गलत तथ्यों के साथ याचिकाएं दायर हो रही हैं। इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जा रहा है। अदालत ने ऐसे मामलों पर कड़ी टिप्पणी की है। हाल ही में एक मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में सामने आया। वहां एक वकील पर जुर्माना लगाया गया। उसने गलत जानकारी देकर याचिका दायर की थी। शपथ पत्र में तथ्यों को छिपाया गया था। अदालत ने इसे गंभीर लापरवाही माना।

खंडपीठ ने कहा कि ऐसे मामलों पर रोक जरूरी है। निजी स्वार्थ के लिए पीआईएल का उपयोग गलत है। याचिकाकर्ता ने अपने खिलाफ केस छिपाया था। यह बात सुनवाई के दौरान सामने आई। अदालत ने 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। इससे स्पष्ट संदेश दिया गया। दूसरी ओर झारखंड हाईकोर्ट में भी एक मामला चल रहा है। यह नेतरहाट विद्यालय से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान कई बातें सामने आईं। अदालत ने हस्तक्षेप के प्रयासों को गंभीर माना।

स्कूल प्रशासन के एक अधिकारी ने आवेदन दायर किया था। उसने याचिका को निजी द्वेष से प्रेरित बताया। कोर्ट ने इस आवेदन को खारिज कर दिया। इसे भी प्रक्रिया का दुरुपयोग माना गया। संबंधित अधिकारी पर भी जुर्माना लगाया गया। जुर्माना राशि सामाजिक कार्य के लिए निर्धारित की गई। अदालत ने पारदर्शिता पर जोर दिया। न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखने को कहा गया। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। इससे न्याय प्रणाली में विश्वास मजबूत होगा।

 

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