हजारीबाग-बरही सड़क चौड़ीकरण पर हाई कोर्ट की नजर पड़ी है। अदालत ने पेड़ों की कटाई को लेकर चिंता जताई। विकास कार्यों में पर्यावरण की अनदेखी पर सवाल उठे। कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई की। न्यायालय ने कहा कि प्रकृति संरक्षण अनिवार्य है। इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
एनएचएआई के अधिकारी अदालत में उपस्थित हुए। कोर्ट ने पांच वर्षों का खर्च विवरण मांगा। अधिकारियों ने 20 हजार पौधे लगाने की जानकारी दी। इस पर 8 करोड़ रुपये खर्च होने की बात कही। याचिकाकर्ता ने इन दावों को गलत बताया। अदालत ने इसे गंभीरता से लिया।
कोर्ट ने कहा कि केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है। उनकी देखभाल और वृद्धि जरूरी है। सड़क किनारे हरियाली दिखनी चाहिए। अन्यथा यह धन की बर्बादी है। अदालत ने पर्यावरण को प्राथमिकता देने को कहा। आगे कड़े निर्देश संभव हैं।


