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अभय तिवारी के परिजनों को अदालत से राहत नहीं.

सुषमा और अक्षय की याचिका पर आया फैसला.

रांची में JSSC-CGL भर्ती फर्जीवाड़ा मामले में अदालत ने दो आरोपियों की जमानत याचिका पर फैसला सुनाया है। अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत ने सुषमा कुमारी और अक्षय तिवारी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। दोनों आरोपी इस मामले के आरोपी अभय तिवारी के परिजन हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुनाया। इससे पहले सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की बहस पूरी हो गई थी। बहस समाप्त होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमितेश कुमार और सचिन कुमार ने पक्ष रखा था। बचाव पक्ष ने दोनों आरोपियों को जमानत देने की मांग की थी। अब अदालत के आदेश के बाद दोनों को फिलहाल राहत नहीं मिली है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।

CID ने सुषमा कुमारी और अक्षय तिवारी को 18 अगस्त को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी JSSC-CGL भर्ती फर्जीवाड़ा मामले की जांच के क्रम में हुई थी। जांच एजेंसी दोनों आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ भी कर चुकी है। पूछताछ के दौरान जांच टीम ने मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी जुटाई थी। इसके बाद दोनों ने 28 अगस्त को अदालत में जमानत याचिका दाखिल की थी। याचिका में दोनों ने न्यायिक हिरासत से राहत देने की मांग की थी। अदालत में इस मामले पर दोनों पक्षों की ओर से दलीलें रखी गईं। सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। अब अदालत ने दोनों जमानत अर्जियों को खारिज कर दिया है। दोनों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

मामले की जांच में अभय तिवारी की भूमिका भी CID के निशाने पर है। अभय तिवारी गोड्डा जिले के खाद्य आपूर्ति विभाग में पदस्थापित था। वह परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी TDPL में मार्केटिंग मैनेजर के रूप में काम कर चुका था। जांच के अनुसार, TDPL में रहते हुए उसने JPSC और JSSC की कई परीक्षाएं पास की थीं। CID अब उसके परीक्षा संबंधी संपर्कों और गतिविधियों की जांच कर रही है। एजेंसी के अनुसार, अभय पर अपने पत्नी और भाई समेत कई परिजनों को कथित तौर पर फर्जी तरीके से नियुक्ति दिलाने का आरोप है। इसी सिलसिले में सुषमा कुमारी और अक्षय तिवारी की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसी मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। कथित फर्जीवाड़े से जुड़े नेटवर्क के अन्य पहलुओं को भी देखा जा रहा है। फिलहाल अदालत ने दोनों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है और CID की जांच जारी है।

 

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