सम्मेलन का आयोजन 18 और 19 सितंबर को भारत मंडपम में किया गया। इसका विषय ‘Financing India’s Journey towards Viksit Bharat’ रखा गया था। इस दौरान देश को वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य पर चर्चा हुई। राधाकृष्ण किशोर ने विकास की प्रक्रिया में पिछड़े राज्यों को पर्याप्त वित्तीय सहयोग देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचना जरूरी है। उनके अनुसार केवल सकल घरेलू उत्पाद और प्रति व्यक्ति आय के आधार पर विकास का आकलन पर्याप्त नहीं है। सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को भी विकास के मूल्यांकन में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य की कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों में वित्तीय निवेश बढ़ाने की जरूरत बताई। सम्मेलन में राज्यों की विकास प्राथमिकताओं और वित्तीय चुनौतियों पर भी चर्चा हुई।
वित्त मंत्री ने कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए बेहतर वित्तीय व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को राज्य के विकास से जोड़कर देखा। उनके मुताबिक किसानों को मजबूत बनाने के लिए कृषि के साथ अन्य ग्रामीण गतिविधियों में भी निवेश जरूरी है। उन्होंने डेयरी क्षेत्र को रोजगार और आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। मछली पालन को भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बताते हुए इसके लिए वित्तीय सहायता की जरूरत रखी। पशुपालन के क्षेत्र में निवेश बढ़ाने से ग्रामीण परिवारों की आय में सुधार की संभावना पर भी उन्होंने बात रखी। उन्होंने कहा कि विकास की योजनाओं में स्थानीय जरूरतों और सामाजिक परिस्थितियों का ध्यान रखा जाना चाहिए। वित्तीय संसाधनों के बेहतर उपयोग को राज्यों की विकास गति से जोड़ने पर भी उन्होंने जोर दिया। उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर वित्तीय समन्वय की आवश्यकता बताई। सम्मेलन में राज्यों के लिए वित्त जुटाने और विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
राधाकृष्ण किशोर ने शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में निवेश को भी प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि मानव विकास को मजबूत किए बिना व्यापक आर्थिक प्रगति हासिल करना कठिन है। शिक्षा में निवेश से युवाओं के कौशल और रोजगार की संभावनाओं को बढ़ाया जा सकता है। स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहतर निवेश से लोगों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। उन्होंने विकास के सामाजिक पक्ष को आर्थिक प्रगति के साथ जोड़ने की जरूरत बताई। उनके अनुसार राज्यों की अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर वित्तीय नीतियों को तैयार किया जाना चाहिए। झारखंड जैसे राज्यों के लिए विकास संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखकर पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने पर उन्होंने जोर दिया। सम्मेलन में देश के विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए वित्तीय रणनीतियों पर चर्चा की गई। इस दौरान राज्य सरकारों की प्राथमिकताओं और वित्तीय जरूरतों को भी चर्चा में शामिल किया गया। झारखंड की ओर से कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों को विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।



