जेएसएससी सीजीएल के नियुक्त अफसरों के लिए 10 सितंबर को राहत भरा आदेश जारी हुआ है। कार्मिक विभाग ने सभी विभागों और कार्यालयों को इन अफसरों से पहले की तरह काम लेने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद उनके वेतन भुगतान का रास्ता भी साफ होने की उम्मीद है। नियुक्ति रद्द होने के बाद से इन अफसरों के सामने काम और वेतन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। राज्य सरकार ने 18 अगस्त को सीजीएल अफसरों की नियुक्ति रद्द कर दी थी। इसके खिलाफ प्रभावित अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने सरकार के नियुक्ति रद्द करने के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके बावजूद कार्मिक विभाग की ओर से करीब 21 दिनों तक कोई स्पष्ट आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया था। आधिकारिक पत्र नहीं होने से विभागों के स्तर पर भी स्थिति असमंजसपूर्ण बनी हुई थी। ट्रेजरी नियमों के कारण बिना आदेश के वेतन बिल पारित करना संभव नहीं था।
सीजीएल भर्ती की प्रक्रिया 21 जून 2023 को 2015 रिक्त पदों के विज्ञापन के साथ शुरू हुई थी। 28 जनवरी 2024 को परीक्षा हुई और उसी दिन प्रश्नपत्र लीक का विवाद सामने आया था। 4 फरवरी 2024 को परीक्षा स्थगित कर दी गई थी। सितंबर 2024 में पुनर्परीक्षा आयोजित की गई और दिसंबर में उसका परिणाम जारी हुआ। जनवरी 2025 में असफल अभ्यर्थियों ने धांधली का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था। 3 दिसंबर 2025 को अदालत ने दस संदिग्धों का परिणाम रोककर बाकी अभ्यर्थियों की मेरिट सूची जारी करने का आदेश दिया था। 8 दिसंबर को 1932 अभ्यर्थियों का अंतिम परिणाम जारी कर नियुक्ति दी गई थी। 5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी। जुलाई 2026 में असफल अभ्यर्थियों ने परीक्षा रद्द करने और सीबीआई जांच की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था। इसके बाद सीआईडी जांच में कई आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ मामला फिर चर्चा में आ गया।
22 जुलाई को सीआईडी ने मुख्य संदिग्ध अभय तिवारी को गिरफ्तार किया था। 18 अगस्त को सरकार ने जेएसएससी सीजीएल समेत टीडीपीएल की 22 परीक्षाओं और उनके परिणामों को रद्द कर दिया था। इस फैसले से 8 दिसंबर 2025 को नियुक्त 1932 अभ्यर्थियों की नौकरी चली गई थी। इसके बाद 19 अगस्त से नियुक्त अभ्यर्थियों ने प्रोजेक्ट भवन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था। 21 अगस्त को हाईकोर्ट ने सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी थी। 24 अगस्त को सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस दिया था। 27 अगस्त को सीआईडी ने दिल्ली से सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार को गिरफ्तार किया था। 28 अगस्त को चार सफल अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी हुई थी। 30 अगस्त को समीर कुमार को गिरफ्तार किया गया था और 7 सितंबर को पटना से राजन कुमार तथा कुंदन कुमार पकड़े गए थे। 8 सितंबर को हाईकोर्ट ने अपनी रोक बरकरार रखते हुए राज्य सरकार को 15 सितंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। अब कार्मिक विभाग के 10 सितंबर के आदेश से नियुक्त सीजीएल अफसरों के काम और वेतन को लेकर प्रशासनिक तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हुई है।



