रांची में सरकारी निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाले खनिजों के चालान को लेकर वसूली के नियमों में बदलाव किया गया है। झारखंड कैबिनेट ने खान विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। नए प्रावधान के तहत बिना वैध चालान के खनिज इस्तेमाल करने पर ठेकेदारों से अधिक राशि वसूली जाएगी। हालांकि, 27 अप्रैल 2026 से पहले के मामलों में पुरानी व्यवस्था लागू होगी। इस अवधि में केवल रॉयल्टी की दोगुनी राशि वसूल की जाएगी। इसके बाद के मामलों में खनिज के मूल्य की दोगुनी राशि और रॉयल्टी की दोगुनी राशि दोनों देनी होंगी। इस तरह वसूली की गणना संबंधित खनिज के बाजार मूल्य और उस पर लागू रॉयल्टी के आधार पर होगी।
राज्य सरकार ने 27 अप्रैल 2026 को बिना चालान इस्तेमाल किए गए खनिजों के भुगतान पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था। इस फैसले के बाद सरकारी काम कर रहे ठेकेदारों के भुगतान प्रभावित हुए। भुगतान रुकने से विकास योजनाओं के संचालन में भी परेशानी हुई। इसके बाद ठेकेदारों ने सरकार को ज्ञापन सौंपकर पहले वाली व्यवस्था बहाल करने का अनुरोध किया। उनकी मांग थी कि 27 अप्रैल 2026 से पहले के मामलों में केवल दोगुनी रॉयल्टी की वसूली की जाए। निर्माण कार्यों से संबंधित विभागों ने ज्ञापन को खान एवं भूतत्व विभाग के पास भेजा। विभाग ने मांग पर विचार करते हुए पुरानी व्यवस्था को सीमित अवधि के लिए लागू करने का प्रस्ताव भेजा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह प्रस्ताव स्वीकृत हो गया।
नई व्यवस्था के अनुसार, 27 अप्रैल 2026 के बाद बिना चालान खनिज इस्तेमाल करने पर ठेकेदारों को अधिक भुगतान करना होगा। उदाहरण के लिए, 100 घनफुट बालू पर पुरानी व्यवस्था के तहत 280 रुपये वसूले जाएंगे। यह राशि 1.40 रुपये प्रति घनफुट की दर से लगने वाली रॉयल्टी की दोगुनी है। यदि उसी मात्रा में बालू का कुल बाजार मूल्य 3,000 रुपये है, तो नई व्यवस्था में खनिज के मूल्य की दोगुनी राशि 6,000 रुपये बनेगी। इसमें 280 रुपये की दोगुनी रॉयल्टी जोड़ने पर कुल राशि 6,280 रुपये होगी। सरकारी निर्माण कार्यों में लगे ठेकेदारों से भी निजी बिल्डरों के अनुरूप वसूली की जाएगी। इस प्रावधान से बिना वैध चालान के खनिज इस्तेमाल करने पर जुर्माने का आर्थिक असर बढ़ेगा। विभाग निर्धारित नियमों के अनुसार मामलों की जांच और वसूली की कार्रवाई करेगा।



