झारखंड में स्वास्थ्य विभाग ने 631 डॉक्टरों के मामलों की समीक्षा शुरू की है। इनमें ऐसे डॉक्टर शामिल हैं जिन्होंने नियुक्ति के बाद ड्यूटी पर योगदान नहीं दिया। कुछ डॉक्टरों के लंबे समय से अनुपस्थित रहने के मामले भी सामने आए हैं। विभाग अब इन मामलों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रहा है। नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जाएगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाना इस प्रक्रिया का प्रमुख उद्देश्य है। विभाग चाहता है कि नियुक्त डॉक्टरों की सेवाओं का उचित उपयोग हो। लंबे समय तक पद खाली रहने से अस्पतालों की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसलिए अनुपस्थिति के मामलों की समीक्षा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विभागीय स्तर पर संबंधित रिकॉर्ड और अनुपस्थिति के विवरण की जांच की जा रही है। इस प्रक्रिया से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किन डॉक्टरों ने योगदान नहीं दिया। लंबे समय से गैरहाजिर डॉक्टरों के मामलों पर भी अलग से ध्यान दिया जाएगा। समीक्षा के दौरान उपलब्ध तथ्यों को ध्यान में रखा जाएगा। इसके बाद नियमों के अनुसार कार्रवाई तय की जा सकती है। सेवा समाप्त करने का विकल्प भी विभाग के विचाराधीन हो सकता है। हालांकि, किसी डॉक्टर की सेवा समाप्त होने की अंतिम पुष्टि अभी नहीं है। कार्रवाई का फैसला जांच पूरी होने और नियमों के आधार पर होगा।
स्वास्थ्य विभाग की इस पहल का मकसद सरकारी चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करना है। अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर उपलब्ध रहना मरीजों के लिए जरूरी है। विभागीय समीक्षा पूरी होने के बाद अगला कदम उठाया जाएगा। फिलहाल 631 डॉक्टरों से जुड़े मामलों की जांच की प्रक्रिया जारी है।



