रांची में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की लंबित प्रारंभिक जांच से जुड़े मामलों पर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। इस मामले की सुनवाई स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर हुई। सुनवाई के दौरान लंबित प्रारंभिक जांच के शीघ्र निष्पादन पर विस्तार से चर्चा की गई। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने राज्य सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।
सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि एसीबी में कई प्रारंभिक जांच पिछले 11 वर्षों से लंबित हैं। लंबे समय तक जांच पूरी नहीं होने से संबंधित लोगों को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई कर्मचारी इस दौरान सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। इसके बावजूद उनके मामलों का निष्पादन नहीं हो सका है। अदालत को बताया गया कि कुछ प्रारंभिक जांच वर्ष 2013 से लंबित हैं। वहीं कुछ मामले वर्ष 2022 से भी पूरे नहीं हो पाए हैं। हस्तक्षेपकर्ता ने समयबद्ध जांच की आवश्यकता पर जोर दिया। अदालत ने प्रस्तुत तथ्यों को गंभीरता से दर्ज किया। लंबित मामलों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी गई। सभी मामलों का अद्यतन रिकॉर्ड प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार को सभी लंबित प्रारंभिक जांच का पूरा विवरण तैयार करना होगा। रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। इसके आधार पर आगे की सुनवाई की जाएगी। अदालत लंबित मामलों की प्रगति की समीक्षा करेगी। समय पर जांच पूरी करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। संबंधित विभागों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई है। न्यायालय के निर्देशों के अनुसार सभी मामलों का अद्यतन ब्यौरा तैयार किया जाएगा। इस प्रक्रिया के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई पर विचार होगा। मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है। तब तक सरकार को अदालत के सभी निर्देशों का पालन करना होगा।



