झारखंड हाईकोर्ट ने नियुक्ति घोटाले की CID जांच को लेकर नई निगरानी व्यवस्था बनाई है। अदालत ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश गौतम चौधरी को मॉनिटर नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति CID पर छात्रों को समन भेजकर परेशान करने के आरोपों के बीच की गई है। मॉनिटर को केवल प्रताड़ना से जुड़े मामलों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। वह नियुक्ति घोटाले की पूरी जांच प्रक्रिया की निगरानी नहीं करेंगे। मामले की जांच करने के लिए CID पहले की तरह स्वतंत्र रहेगी। अदालत ने कहा है कि मॉनिटर की नियुक्ति से जांच प्रभावित नहीं होनी चाहिए। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने CID की कार्रवाई को लेकर शिकायत रखी थी। उन्होंने कहा कि जांच के नाम पर कुछ निर्दोष छात्रों को भी नोटिस भेजे जा रहे हैं। उन्होंने अदालत से ऐसे अभ्यर्थियों को अनावश्यक परेशानी से बचाने की मांग की।
अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने कहा कि कुछ उम्मीदवारों का इस मामले से कोई संबंध नहीं है। इसके बावजूद उन्हें पूछताछ के लिए समन जारी किए जाने की बात अदालत के सामने रखी गई। उन्होंने बताया कि कई उम्मीदवार जांच अधिकारी को मामले में जानकारी नहीं होने की बात कहते हैं। इसके बाद भी उन्हें कथित तौर पर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने अदालत से जांच के दौरान निर्दोष लोगों के हितों का ध्यान रखने का आग्रह किया। सरकार की ओर से महाधिवक्ता और मीनाक्षी अरोड़ा ने इन दलीलों पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जांच अधिकारी को आवश्यकता के अनुसार किसी व्यक्ति को पूछताछ के लिए बुलाने का अधिकार है। सरकार ने स्पष्ट किया कि जांच अधिकारी को समन जारी करने से नहीं रोका जा सकता। हालांकि, सरकार की ओर से निगरानी के विकल्प की बात भी अदालत के सामने रखी गई। बताया गया कि जरूरत होने पर किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से जांच के दौरान प्रताड़ना से जुड़े मामलों की निगरानी कराई जा सकती है।
सरकार के इस पक्ष के बाद हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस गौतम चौधरी को मॉनिटर नियुक्त करने का फैसला लिया। अब वह समन और पूछताछ से जुड़ी प्रताड़ना की शिकायतों पर नजर रखेंगे। उनकी जिम्मेदारी CID की जांच के प्रत्येक चरण की निगरानी करना नहीं होगी। नियुक्ति घोटाले से जुड़े मामलों में CID अपनी जांच जारी रख सकेगी। जांच अधिकारी जरूरत के मुताबिक संदिग्धों या संबंधित लोगों से पूछताछ कर सकते हैं। वहीं प्रताड़ना से संबंधित किसी शिकायत को मॉनिटर के सामने रखा जा सकेगा। अदालत ने जांच और मॉनिटरिंग की जिम्मेदारियों को अलग रखा है। इससे जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सीधा असर नहीं पड़ेगा। साथ ही छात्रों और अभ्यर्थियों से जुड़ी शिकायतों की निगरानी का प्रावधान रहेगा। हाईकोर्ट की इस व्यवस्था के बाद गौतम चौधरी नियुक्ति घोटाले की जांच में प्रताड़ना से जुड़े मामलों की निगरानी करेंगे।



