झारखंड हाईकोर्ट ने खनन पट्टे से जुड़े विवाद पर फैसला सुनाया है। अदालत ने याचिकाकर्ता को राहत देने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि रॉयल्टी भुगतान जरूरी शर्त है। मामला पलामू जिले से संबंधित है। खनन पट्टा 2014 में आवंटित हुआ था। इसकी अवधि दस वर्षों की थी। सभी पर्यावरणीय अनुमतियां थीं। फिर भी भुगतान नहीं किया गया। अदालत ने इसे नियम उल्लंघन माना। सरकारी निर्णय को वैध ठहराया गया।
राज्य सरकार ने अदालत को तथ्य बताए। तीन साल तक रॉयल्टी बकाया रही। नोटिस जारी किया गया था। भुगतान नहीं होने पर कार्रवाई हुई। उपायुक्त ने पट्टा समाप्त किया। याचिकाकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने नोटिस प्रक्रिया पर सवाल उठाए। राज्य ने नियमों का हवाला दिया। अदालत ने राज्य का पक्ष स्वीकार किया। कानून के तहत निर्णय सही माना गया।
खंडपीठ ने कहा कि बकाया तथ्य स्वीकार है। मामले को वापस भेजना व्यर्थ होगा। प्राकृतिक न्याय का तर्क लागू नहीं होता। खान आयुक्त का आदेश सही ठहराया गया। याचिका खारिज कर दी गई। यह फैसला खनन नियमों को मजबूती देता है। नियम तोड़ने पर राहत नहीं मिलेगी। खनन क्षेत्र में अनुशासन जरूरी बताया गया। अदालत ने सख्त संदेश दिया। सरकारी नियम सर्वोपरि माने गए।


