प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से धनबाद में की गई हालिया छापेमारी के बाद जांच नए चरण में पहुंच गई है। सूत्रों के अनुसार एजेंसी को छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड मिले हैं। इनमें कुछ ऐसे दस्तावेज भी शामिल बताए जा रहे हैं जिनमें विभिन्न अधिकारियों को कथित रूप से किए गए भुगतान का विवरण दर्ज है। दस्तावेजों में संबंधित व्यक्तियों के नाम के बजाय केवल उनके पदनाम लिखे गए हैं। इन पदनामों में पुलिस विभाग के साथ कुछ प्रशासनिक अधिकारियों के पद भी शामिल बताए गए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार भुगतान का उल्लेख मासिक आधार पर किया गया है। छोटे पदों के सामने हजारों रुपये और बड़े पदों के सामने लाखों रुपये की राशि दर्ज होने की बात सामने आई है। हालांकि इन भुगतानों का उद्देश्य दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है। ईडी अब इन रिकॉर्ड की सत्यता और उनसे जुड़े तथ्यों का सत्यापन कर रही है। फिलहाल जांच एजेंसी ने इस संबंध में किसी अधिकारी की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
गौरतलब है कि 28 जुलाई को ईडी ने धनबाद के डिप्टी मेयर अरुण चौहान, उनके भाई हरेंद्र चौहान तथा कई कोयला कारोबारियों और उनके सहयोगियों के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। इस कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए। जांच में करीब 160 करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड निवेश से जुड़े दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा 200 से अधिक सेल डीड भी जब्त किए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक कुछ रिकॉर्ड में कथित भुगतान का विस्तृत हिसाब-किताब भी दर्ज मिला है। एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन लेनदेन का संबंध कथित अवैध कोयला कारोबार से था या नहीं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इन भुगतानों का उद्देश्य किसी प्रकार का संरक्षण प्राप्त करना था। हालांकि इन सभी बिंदुओं की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। ईडी ने जब्त दस्तावेजों को जांच के लिए सुरक्षित रखा है। पूरे मामले की कई स्तरों पर पड़ताल जारी है।
सूत्रों के अनुसार जब्त दस्तावेजों में धनबाद के अलावा अन्य जिलों से जुड़े कुछ पदनामों का भी उल्लेख मिला है। इससे जांच का दायरा और व्यापक होने की संभावना जताई जा रही है। एजेंसी यह भी जांच रही है कि कथित अवैध कोयला कारोबार का नेटवर्क किन-किन क्षेत्रों तक फैला हुआ था। इसके अलावा ईडी को कुछ सरकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट भी मिलने की जानकारी सामने आई है। इन रिपोर्टों में अवैध कोयला कारोबार से संबंधित सूचनाएं और कुछ कारोबारियों का उल्लेख बताया गया है। एजेंसी अब इन सभी दस्तावेजों का अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के साथ मिलान कर रही है। जांच के दौरान डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड का भी विश्लेषण किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों की पुष्टि के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल किसी भी व्यक्ति की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष घोषित नहीं किया गया है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आने की संभावना है।



