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हाईकोर्ट ने अवमानना मामले में पूर्व आदेश वापस लिया और जुर्माना लगाया

तथ्य छिपाने पर अदालत सख्त, बारह प्रतिवादियों को मिलेगी क्षतिपूर्ति राशि.

रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट ने महादेव उरांव की ओर से दायर अवमानना याचिका पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति राजेश शंकर की अदालत ने मामले में पहले पारित एकल पीठ के आदेश को वापस लेने का निर्देश दिया। यह आदेश रातू रोड स्थित मधुकम क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से जुड़ा था। अदालत ने सुनवाई के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विस्तार से विचार किया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने रिट याचिका में महत्वपूर्ण तथ्यों का उल्लेख नहीं किया। न्यायालय के अनुसार प्रतिवादियों से प्राप्त लगभग एक करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान की जानकारी छिपाई गई थी। साथ ही संबंधित व्यक्तियों को रिट याचिका में प्रतिवादी भी नहीं बनाया गया। अदालत ने इसे न्यायिक प्रक्रिया के लिए गंभीर विषय माना। कोर्ट ने कहा कि किसी भी याचिका में सभी तथ्य स्पष्ट और सही तरीके से प्रस्तुत करना आवश्यक है। इसी आधार पर अदालत ने अपना विस्तृत फैसला सुनाया।

हाईकोर्ट ने महादेव उरांव पर 12 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने निर्देश दिया कि यह राशि मामले से जुड़े 12 प्रतिवादियों को एक-एक लाख रुपये के रूप में दी जाएगी। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि शपथ पत्र में गलत और अधूरी जानकारी दी गई थी। कोर्ट के अनुसार याचिकाकर्ता ने हस्तक्षेपकर्ताओं से हुए पैसों के लेनदेन का भी खुलासा नहीं किया। अदालत ने इसे न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास माना। सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सचिन कुमार और अधिवक्ता गौरव राज ने पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने अंतिम निर्णय सुनाया। फैसले में न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और सत्य तथ्यों के महत्व पर भी जोर दिया गया। अदालत ने कहा कि न्यायालय के समक्ष गलत जानकारी देना स्वीकार्य नहीं है। इस फैसले के बाद मामले में नया कानूनी मोड़ आ गया है।

यह पूरा विवाद खादगढ़ा शिव-दुर्गा मंदिर रोड स्थित मुंडारी प्रकृति की जमीन से जुड़ा हुआ है। जिला प्रशासन ने इस जमीन पर बने 12 मकानों को हटाने का आदेश दिया था। आदेश के बाद प्रशासन ने बुलडोजर की कार्रवाई शुरू की थी। स्थानीय लोगों ने इस कार्रवाई का विरोध किया था। उनका कहना था कि उन्होंने प्रति कट्ठा 5.25 लाख रुपये की दर से जमीन खरीदी थी। लोगों के अनुसार 38.25 डिसमिल जमीन के लिए कुल लगभग एक करोड़ आठ लाख तिरानवे हजार सात सौ पचास रुपये का भुगतान किया गया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि वे वर्षों से वहां मकान बनाकर रह रहे हैं। इसके बावजूद बेदखली की कार्रवाई शुरू होने पर मामला न्यायालय तक पहुंचा। हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब आगे की कार्रवाई कानून और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप होगी। संबंधित पक्ष उपलब्ध कानूनी विकल्पों के आधार पर आगे की प्रक्रिया अपनाएंगे।

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