Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने बच्चों की कस्टडी और उनसे मिलने के अधिकार से जुड़े मामलों में अहम पहल की है। हाईकोर्ट ने Child Custody और Child Access के मामलों को लेकर अंतरिम व्यवस्था तय की है। इसमें माता-पिता की जिम्मेदारियों से जुड़े Parenting Plan को भी शामिल किया गया है। चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने इस संबंध में आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि स्थायी नियम बनने तक कलकत्ता हाईकोर्ट की गाइडलाइन को अपनाया जाएगा। यह गाइडलाइन झारखंड में अंतरिम रूप से प्रभावी रहेगी। खंडपीठ ने यह आदेश स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने बच्चों से जुड़े पारिवारिक मामलों में स्पष्ट प्रक्रिया की आवश्यकता पर जोर दिया। बढ़ते मामलों को देखते हुए इस दिशा में व्यवस्था बनाने की जरूरत महसूस की गई।
हाईकोर्ट ने अपने रजिस्ट्रार जनरल को गाइडलाइन सभी संबंधित न्यायालयों तक भेजने का निर्देश दिया है। गाइडलाइन राज्य के सभी जिला जजों को उपलब्ध कराई जाएगी। इसे फैमिली कोर्ट और मजिस्ट्रेट के न्यायालयों तक भी पहुंचाया जाएगा। बच्चों की कस्टडी से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाले अन्य न्यायालयों को भी गाइडलाइन दी जाएगी। वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों में भी इसका उपयोग किया जा सकेगा। पारिवारिक विवादों में बच्चों से संबंधित मामलों के लिए भी यह व्यवस्था लागू होगी। गाइडलाइन को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सभी न्यायाधीशों तक भेजा जाएगा। इसके अलावा प्रत्येक प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को इसकी भौतिक प्रति दी जाएगी। कोर्ट ने गाइडलाइन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य संबंधित न्यायालयों में एक स्पष्ट प्रक्रिया उपलब्ध कराना है।
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि झारखंड हाईकोर्ट ने अभी तक इन विषयों पर अपनी विशेष गाइडलाइन तैयार नहीं की है। Child Access, Child Custody और Parenting Plan को लेकर फिलहाल स्थायी नियम मौजूद नहीं हैं। ऐसे मामलों की संख्या बढ़ने के कारण कोर्ट ने इस विषय पर प्रक्रिया शुरू की है। हाईकोर्ट ने मामले को रूल्स कमेटी के समक्ष भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रूल्स कमेटी इस विषय पर स्थायी नियम तैयार करने की दिशा में काम करेगी। तब तक कलकत्ता हाईकोर्ट की गाइडलाइन अंतरिम व्यवस्था के रूप में लागू रहेगी। इससे बच्चों की कस्टडी और मिलने के अधिकार से जुड़े मामलों में न्यायालयों को मार्गदर्शन मिलेगा। माता-पिता की जिम्मेदारियों और बच्चों के हितों से जुड़े मामलों में भी इसका उपयोग किया जाएगा। हाईकोर्ट की इस पहल से पारिवारिक विवादों में बच्चों के हितों को लेकर स्पष्टता बढ़ने की उम्मीद है। स्थायी नियम तैयार होने के बाद झारखंड में अपनी अलग व्यवस्था लागू की जा सकेगी।



