रांची में झारखंड विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कक्ष में शुक्रवार को ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से शिष्टाचार मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ब्रह्माकुमारी निर्मला जी ने किया। उनके साथ इंदु साबू, प्रदीप कुमार और सुनैना कुमारी भी मौजूद रहे। मुलाकात के दौरान आत्मीय और सौहार्दपूर्ण वातावरण देखने को मिला। ब्रह्माकुमारी निर्मला जी ने मुख्यमंत्री की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा। उन्होंने रक्षाबंधन के पावन पर्व की शुभकामनाएं भी दीं। इस अवसर पर सावन माह के आध्यात्मिक महत्व पर चर्चा की गई। प्रतिनिधिमंडल ने प्रेम, विश्वास और भाईचारे का संदेश दिया। सभी ने समाज में सकारात्मक सोच और नैतिक मूल्यों को अपनाने की अपील की। कार्यक्रम में आध्यात्मिक और सामाजिक समरसता पर विशेष जोर दिया गया।
ब्रह्माकुमारी प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि रक्षाबंधन केवल एक पर्व नहीं बल्कि विश्वास और सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने लोगों से पवित्रता और मानवीय मूल्यों को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की। समाज में प्रेम और सद्भाव बनाए रखने का संदेश दिया गया। सभी नागरिकों के सुखद और शांतिपूर्ण जीवन की कामना की गई। प्रतिनिधिमंडल ने राज्य की उन्नति और समृद्धि के लिए मंगलकामनाएं व्यक्त कीं। जनकल्याण और सामाजिक एकता को मजबूत करने पर भी बल दिया गया। आध्यात्मिक जीवन को तनावमुक्त और सकारात्मक जीवन का आधार बताया गया। कार्यक्रम में नैतिक शिक्षा के महत्व पर भी चर्चा हुई। उपस्थित लोगों ने इस संदेश का स्वागत किया। पूरा कार्यक्रम प्रेरणादायक वातावरण में संपन्न हुआ।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने ब्रह्माकुमारी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए शुभकामनाओं के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज में नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों का प्रसार समय की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा किए जा रहे सामाजिक और आध्यात्मिक कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुख्यमंत्री ने सभी को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने राज्य में शांति, सद्भाव और विकास की कामना की। समाज में आपसी विश्वास और भाईचारे को मजबूत करने पर जोर दिया। कार्यक्रम सौहार्द और आत्मीयता के माहौल में संपन्न हुआ। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के स्वस्थ और सफल जीवन की भी कामना की। मुलाकात ने सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक जागरूकता का सकारात्मक संदेश दिया।



